2025 बिहार के चुनाव परिणाम से एक तरफ खुशी की लहर तो दूसरी तरफ मातम। स्वभाविक है ऐसा होता है और आगे होता भी रहेगा। बिहार के चुनाव में चाणक्य नीति न काम करती हो ऐसा कैसे हो सकता है? जनमत का हम सभी आदर करते है भले ही आपसी विचारधारा विरोधाभास हो। 

    बिहार में ये पहली बार नहीं है सुबह बढत वाले शाम ढलते ढलते लुढक सा गये और लुढके लोग सत्ता पर काबिज हो गये। 


    जदयू के भरोसे बीजेपी बिहार में वापसी की है जबकि बीजेपी के साथ जनमत नहीं था। नीतीश बाबू सीट बंटवारे के समय ही पचास प्रतिशत वाला तडका लगा चुके थे ये बात बीजेपी समझ चुकी थी कि नीतीश बाबू पलटी मारते है तो दिल्ली खतरे मे आ सकती है इसलिए बराबरी में रहना नहीं चाहती उसने जदयू को पछाडने का जो नीति अपनाया, वो विपक्ष को साईलेंट किलर जैसा काम किया। उसके लिए बीजेपी ने देश के विभिन्न राज्यों से कार्यकर्त्ताओं को भेजना शुरु किया। लोकतंत्र में भीड का बहुत महत्व है जहाँ से लोगों का मन बदल जाता है। 

    महाचतुर नीतीश बाबू अपनी पार्टी को बहुत हद तक पुरानी छवि में लाने का जो प्रयास किये उसमें बहुत हद तक सफल भी रहे। 

    2025 के चुनाव परिणाम से जो बातें निकलकर सामने आयी उसमें कोई संदेह नहीं कि बीजेपी एक तीर से दो निशान साधे। एक तरफ बिहार मे सबसे बडो पार्टी, दूसरा ये कि जदयू छोड एनडीए के अन्य छोटी पार्टीयों पर पूरा भरोसा करना। 

     सुशासन नीतीश बाबू आगे तब लाचार होंगे जब बीजेपी लोजपा व अन्य के साथ तब सरकार बनाने का दावा करेगी। जब भूलवश सुशासन बाबू पलटी मारते है चूकि गठबंधन है इसलिए जल्लेदबाजी होगा लेकिन इसके साथ ही साथ उन पर भारी दबाव बनाने से बीजेपी नहीं चूकेगी। जो बीजेपी की जन्मजात निशानी है। 

     जो भी हो वो समय बतायेगा। बिहार में बीजेपी का महिलाओ को दस हजार का छौंका काम कर गया बिना सिलेँडर वाला चूल्हा बांट दिया सा गया। बिहारी जनमानस को आज से दस हजारा वाला सिलेंडर सपना अब अपना दिखने लगेगा।

      बिहार चुनाव में वोट प्रतिशतता ने साबित किया कि बिहारी लोगों को गुजराती मैथ पढना चाहिए, दो दुना चार नही🫠 बल्कि दो दुना बीस होता है😂 महिलाओं को दस दस हजार रुपये हर माह मिलेंगे लोगों को जो पैसा बाहर से उनके पति व बेटा मजदूरी कर भेजते थे वो तो बैठे बिठाये घर पर मिलेगा फिर मजदूरी करने बाहर क्यों जाये।

      बिहारी जनमानस में जातिये असमानता का जो दोष है उसका असर बिहार के किसी भी चुनाव मे बहुत असरदायक साबित होता है। बीजेपी लोकतंत्र पर विश्वास नही करती बल्कि अप्रत्यक्ष संघ पर पूरा विश्वास करती है। दोनों संगठनों में न्यूनतम विरोध अधिकतम सहयोग की नीति चली आरही है। ये कहना मुश्किल सा है कि आने वाले समय मे संघ अकेलापन महसूस करेगा जब वो न चाहते हुए भी बीजेपी के भरोसे अपनी दुकान चलायेगा। 



 एनडीए बम्पर बहुमत के साथ बिहार की सत्ता पर प्रचंड वापसी की है इस उपलब्धि पर नीतीश बाबू गदगद हो गये होंगे लेकिन ये खुशी कब तक रहेगा ये आने वाला भविष्य तय करेगा।

      बेरोजगार युवाओ को जोरों का झटका धीरे से लगा होगा जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। जो किसान कल तक न्यूनतम दर पर बिजली का आनन्द ले रहे थे उन्हे अब कडी मेहनत करनी होगी। बिहार के पास एनडीए का विकल्प इंडिया था अब इस इंडिया को भी सोचना चाहिए कि बिहार मे कांग्रेस को राजद के साथ रहना चाहिए या उसे नये रास्ते तलाशने चाहिए वही एनडीए मे बीजेपी ने नया रास्ता बना लिया है। जिसमे कल तक नीतीश बाबू पलटी मारते रहे आगे बीyiजेपी पल्टी मार कर सीधे सत्ता पर काबिज हो जायेगी। 

      लोकतान्त्रिक देश में जनतंत्र का मत सर्वोच्च है जो हम सभी को स्वीकार है। 

                          🙏जय हिन्द 🙏

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