राष्ट्रपिता :- महात्मा गांधी

(विश्व में भारत की पहचान)


पाकिस्तान एक बहुत बुरा देश है , बर्बाद और तबाह देश है , बिल्कुल तबाह , आतंकवादियों की पैदावार करता है, हमारे देश में आतंकवादियों को भेजकर खून खराबा करवाता है। उसमें दुनिया भर की बुराई है मगर एक अच्छाई यह है कि पाकिस्तान के लोग पाकिस्तान बनाने वाले अपने "कायदे आज़म" मुहम्मद अली जिन्ना की हमसे हमारे द्वारा महात्मा गांधी की की गयी इज़्ज़त से कहीं अधिक इज़्ज़त करते हैं।


इसके बावजूद कि जिन्ना एक पाश्चात्य संस्कृति वाला व्यक्ति था, और उनके मुकम्मल ईमान पर बहुत सारे सवाल हैं , और बहन फातिमा जिन्ना के अनुसार जिन्ना धार्मिक नहीं थे।

मगर इसके बावजूद एक कट्टर इस्लामिक देश पाकिस्तान में मुहम्मद अली जिन्ना के खिलाफ एक शब्द बोल दीजिए, आप दूसरा शब्द बोल नहीं पाएंगे..पीट दिए जाएंगे.. वहां लोग एहतराम में मुहम्मद अली जिन्ना का नाम नहीं लेते बल्कि सिर्फ "कायद ए आज़म" कहते हैं... उनके खिलाफ वहां फिल्में नहीं बनी , किताबें नहीं लिखी गयी 

जैसे भारत में "गांधीवध"  , " हमने गांधी को क्यों मारा"... वहां का प्रधानमंत्री यह नहीं कहता कि एक विदेशी फिल्मकार ने फिल्म नहीं बनाई होती तो जिन्ना को कोई नहीं जानता...

हमारा देश बहुत महान है, बेहद धार्मिक और अपनी हर सभाओं में "रामधुन" "रघुपति राजा राघव‌ राम" भजन गाने और बजाने वाले राष्ट्रपिता की रामभक्त कहे जाने वाले लोगों ने ना सिर्फ गोली मारकर हत्या की गई बल्कि आजतक उनके पुतले को गोली मारी जा रही है , मुर्तियां तोड़ी जा रही है और उनके नाम मिटाने की कोशिश उनके देश में ही हो रही है।

महात्मा गांधी की अपने देश के लिए किए योगदान से अधिक महत्वपूर्ण उनके आदर्श और उनके विचार पूरी दुनिया में छाए हुए हैं और अपने देशों में क्रांति करने वाले मार्टिन लूथर किंग से लेकर नेल्सन मंडेला और बराक ओबामा तक जिन्ना नहीं बल्कि गांधी के विचारों से प्रेरित हैं।

यही कारण है कि पूरी दुनिया के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जब भारत आते हैं तो वह किसी मंदिर मस्जिद में नहीं जाते बल्कि "राजघाट" बापू की समाधि जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं..अभी ब्लादिमीर पुतिन भी आए..और इतने कम समय के प्रोग्राम में महात्मा गांधी के पास जाना नहीं भूले।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के 2019 के RTI जवाब के अनुसार, दुनिया भर के 192 देशों में से 102 देशों में महात्मा गांधी की मूर्तियां या स्मारक सम्मान के प्रतीक के तौर पर स्थापित थीं जो 2025 में बढ़ कर 116 देशों तक हो गया है। सावरकर को अपना आदर्श मानने वाले प्रधानमंत्री भी विदेश में जाकर गांधी जी की प्रतिमा पर ही शीश नवाते है, पूरे विश्व में भारत की पहचान गांधी हैं।

यह सम्मान पूरी दुनिया के किसी भी राष्ट्रपिता को नहीं मिला...ना अमेरिका के राष्ट्रपिता को जो पूरी दुनिया का बादशाह है और ना इंग्लैंड के राष्ट्रपिता को जिसकी 3 चौथाई दुनिया पर हुकूमत थी।

उदाहरण देखिए कि दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका में महात्मा गांधी की सबसे अधिक 25 से ज्यादा मूर्तियां हैं और वाशिंगटन डीसी के पास भारतीय दूतावास के सामने सबसे अधिक प्राइम लोकेशन पर महात्मा गांधी की सबसे प्रसिद्ध मूर्ति स्थापित है।

यूनाइटेड किंगडम में लंदन के संसद स्क्वायर में , दक्षिण अफ्रीका जोहान्सबर्ग के गांधी स्क्वायर में, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड , स्पेन, अर्जेंटीना, रूस , चीन, जापान, कनाडा, इटली यहां तक कि पाकिस्तान में भी गांधी जी का स्मारक मौजूद है..और एक जगह नहीं 7 जगह भव्यता के साथ मौजूद है...

गांधी जी की विरासत इतनी गहरी है कि 80 से अधिक देशों ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किए हैं। भारत से इतर विश्व भर में 48 प्रमुख सड़कें महात्मा गांधी के नाम पर हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 15 जून 2007 को महात्मा गांधी की जयंती  2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। यह दिन वैश्विक शांति, सहिष्णुता और अहिंसा के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। 

यूएन मुख्यालय के नॉर्थ लॉन में भारत द्वारा दान की गई गांधी की बस्ट स्थापित है, जहां "Unity in Diversity" (विविधता में एकता) शब्द उकेरे गए हैं।

नॉर्वे की नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने स्वीकार किया कि महात्मा गांधी को यह पुरस्कार न मिलना उनके नोबल पुरस्कार के इतिहास की सबसे बड़ी चूक थी जिसका उन्हें सदैव पछतावा रहेगा...

ध्यान दीजिए कि महात्मा गांधी को 1937, 1938, 1939, 1947 और 1948 में नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था, लेकिन उन्हें कभी नहीं मिला।  

महात्मा गांधी जिस ब्रिटिश हुकूमत से लड़कर भारत को स्वतंत्रता दिलाई उस ब्रिटेन के लंदन में संसद भवन के बाहर गांधी की प्रतिमा स्थापित है। यहां तक कि चीन ने 2015 में शंघाई के फुदान विश्वविद्यालय में गांधी अध्ययन केंद्र स्थापित किया और सबसे महत्वपूर्ण महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन , जिन्होंने महात्मा गांधी के बारे में कहा था कि "आने वाले 100-200 साल में कोई विश्वास नहीं करेगा कि हांड मांस का कोई ऐसा व्यक्ति इस धरती पर था"

Apple के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने गांधी के चश्मे को ट्रिब्यूट के रूप में अपनाया जिसका जॉब्स ने अपनी आत्मकथा में उल्लेख किया ...कहने का मतलब यह है कि हर देश के राष्ट्रपिता होते हैं मगर पूरी दुनिया में इतना सम्मान किसी और देश के राष्ट्रपिता को नहीं मिला जो भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मिला..और हम बापू के साथ क्या कर रहे हैं? उनके नाम को मिटाने की कोशिश, उनके नाम से चलती एक योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाने के लिए "राम" के नाम का सहारा...

अपने देश में महात्मा गांधी का नाम केवल राम के सहारे ही हटाया भी जा सकता है, लेकिन पूरे विश्व से नहीं हटाया जा सकता है।।

बापू पूरी दुनिया के एक मात्र ऐसे राष्ट्रपिता होंगे जो अपने ही देश में कुछ लोगों द्वारा अपमानित किए जाते हैं। कोई उनके पुतले को गोली मारता है तो  है।

सोशलमीडिया पर बापू को अश्लील गाली देने वालों की भी एक लंबी फौज है। देश की 70 साल की एक यह भी उपलब्धि है कि कोई भी अपने राष्ट्रपिता की आलोचना कर सकता है , गालियां दे सकता है उस दौर में जहाँ प्रदेश के एक अदने से मुख्यमंत्री की आलोचना पर राष्ट्रदोह और प्रधानमंत्री की आलोचना पर यूएपीए लग जाता है। पर पूरी दुनिया में ऐसा नहीं है , वह अपने राष्ट्रपिता का सम्मान करना जानते हैं , इस्माईल केमेली अल्बानिया के राष्ट्रपिता हैं। अहमद शाह दुर्रानी- अफगानिस्तान , जोस दे सन मार्टिन अर्जेंटीना के राष्ट्रपिता हैं तो डोम पेड्रो  ब्राज़ील के राष्ट्रपिता हैं। सर जे ए मैकडोनाल्ड कनाडा के राष्ट्रपिता हैं तो सुन यात सेन चाईना के राष्ट्रपिता हैं। इब्न सउद  सउदी अरबिया के राष्ट्रपिता हैं तो ली कोन इव सिंगापुर के राष्ट्रपिता। नेल्सन मंडेला साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपिता हैं तो डी एस सेनानायके श्रीलंका के राष्ट्रपिता हैं। जार्ज वाशिंगटन अमेरिका के फाउंडिग फादर हैं।

यह हैं पूरे विश्व के कुछ देशों के राष्ट्रपिता जो अपने देश में राजनीति से बहुत उपर हैं और सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हैँ । सभी देशों के राष्ट्रपिता ऐसे ही सम्मान प्राप्त करते हैं।

कुछ एक को छोड़कर आपने किसी का नाम भी ना सुना होगा पर अपने देशों में ये निर्विवाद हैँ। सरकारें आये या जाएं,इनका सम्मान सदैव समान रहता है ।हमारे राष्ट्रपति बापू महात्मा गांधी पूरे विश्व में सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपिता हैं जिनकी प्रतिमा पूरी दुनिया के देशों में है। पूरी दुनिया में बापू का एक सम्मान है। मगर पूरी दुनिया के देशों में सम्मानित बापू भारत में बहुतों के लिए घृणा और गाली गलौज के पात्र हैं ।

                                    

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