अमेरिकन ट्रेडवार से करें भविष्य का निर्माण    

                  अमेरिकन ट्रेडवार से दुनियाँ को आपदा में अवसर खोजने के लिए विवश होना पड़ा | 2019 से 2021 तक कोविड महामारी के दौरान भारतीय जनमानस को भारत सरकार ने आपदा में अवसर जैसा स्लोगन का प्रचार जम कर किया | जिसका फायदा एक दो के अलावा कोई नहीं उठा सका | इस सलोगन का अधिकतम फायदा इत्तेफ़ाक़न देश की सभी नामी गिरामी कम्पनियों ने जम कर उठाया | यहाँ तक की भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)' नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की स्थापना की गई। जिस पर मालिकाना हक खुद प्रधानमंत्री का है उसका सरोकार सरकार से नहीं है |  
       



अमेरिकन ट्रेडवार ने दुनियाँ के सभी विकाशशील देशों के उन युवाओं को ट्रेडवार की जानकारी दी जो ट्रेडवार जगत से वाकिफ नहीं थे |  विकाशशील देशो को किस तरह विकसित देश अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते है वो जगजाहिर हो गया | ट्रेडवार का असर सबसे ज्यादा भारत और चीन पर पड़ा | 

        दो विकसित देशों में वर्चस्व की लड़ाई ने पुरे विश्व की आर्थिक संचार की धज्जिया उड़ाने पर जी तरह तुली है उससे ज्ञात होता है की किसी भी देश की प्रगति में ब्रेक लगाना | 
 
            भारत की लचीलापन राजनीतिक इक्षाशक्ति सबसे कमजोर साबित होती जा रही है |  देश में हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव और सभी राज्यों की बुनियादी लड़ाई और जरुरत देश को कंगाली के राह पर लेजाता दिख रहा है | 
           भारत का विकाश तभी संभव है जब सरकार द्वारा जारी योजना में लाभार्थी के कार्यों की समीक्षा करे और उस कार्य को राष्ट्रीय कैटेगरी में खड़ा करे |  सरकार सभी कल कारखाने को सस्ती बिजली और न्यून्तम  कर के दायरे में लाये |
          प्रतिभाशाली उभरते छात्रों को देश के विकाश में योगदान के लिए प्रेरित करे | विदेश जा रहे प्रतिभाशाली छात्रों को अपने यहाँ प्रौद्योगिकी तकनीकि में नवनिर्माण में सृजन करने का लुभावना अवसर दे | 
        आज हमारे देश का सही विकाश तब तक नहीं होगा तब तक देश आत्मनिर्भर नहीं होगा |  हमें इसराइल से सीखना चाहिए |  संख्याबल से नहीं बल्कि दृण इक्षाशक्ति से देश का विकाश होगा | 
      भारत को हमेशा चीन और पकिस्तान के हासिये पर रखकर यूरोप तौलता और सौदा करता है अब धीरे धीरे मालदीव और बांग्लादेश भी इसी श्रेणी में आ चूका है | समझाना होगा की क्या हम विदेशी हथियार के बल पर देश का विकाश कर पाएंगे या हम अपनी सही नीति को सही से लागु करके के विकाश को गति प्रदान करेंगे ! 
     देश की 10 प्रतिशत आबादी राजनीति की जाल में फसी है, 30 प्रतिशत आबादी को देश से कोई लेना देना नहीं है  जिसका नतीजा चुनाव में देखने को मिलता है, 20 प्रतिशत आबादी अबोध है,  20 प्रतिशत आबादी अपनी जीविका के लिए परेशां है, 2 प्रतिशत आबादी पांखण्ड की जाल बिछा कर 98 प्रतिशत आबादी  राज करना चाहती है, 18 प्रतिशत आबादी ही मूल है जिसमे सरकारी तथा प्राईवेट नौकरी , किसान व् मजदूर सम्मिलित है ये आकड़ा सरकारी नहीं है लेकिन लगभग आपको हर जगह ये देखने को मिल सकता है | 

                         सरकार की नीति अबोध 20 प्रतिशत आबादी पर करना चाहिए जो देश के विकाश में पूरा सहयोग कर सकते है जिसके लिए जरुरत है न्यूनतम फीस में उच्च शिक्षा और शिक्षा का उच्चस्तर का बनाना जैसे विषय शामिल हों |  बच्चों को प्राथमिक कक्षाओ से ही उनके अंदर राष्ट्र भावना और विकाश मंत्र देना चाहिए | तकनीकी ज्ञान अनिवार्य कर देना चाहिए | तकनीकी निर्माण पर आधारित फिल्म दिखाने चाहिए | जिससे उनका बौद्धिक विकाश को गति मिले |  उनकी ऊर्जा से ही देश का सही विकाश होगा | 

टिप्पणियाँ