फक्कड़ की इज्जत दाव पर 




मनसौखी नाई की दुकान पर जब फक्कड़ बाबा सुबह सुबह पहुँचे तब मनसौखी समझ चूका था आज का बोहनी भी उधारी ही रहेगा ! 

फक्कड़ कब गरम कब ठंडा हो जाये ये किसी को पता नहीं रहता था लेकिन मनसौखी नाई फक्कड़ के नस नस से भलीभांति वाकिफ था फिर भी मनसौखी धोखा खा ही जाता था | 

मनसौखी- का हो फक्कड़ बाबा , बहुत दिनों बाद फुर्सत मिला !

फक्कड़- अरे मनसौखी देख नहीं रहे हो ससुरी दाढ़ी मुछ कितनी जल्दी निकल गयी 

मनसौखी- उधारी करोगे तो उसका हिसाब कौन करेगा फक्कड़ !

फक्कड़- देख भाई मनसौखी इस समय हाथ थोड़ा कसा हुआ है हरियाली आने में कुछ देर है, लेकिन मनसौखी तुम तो बचपन के दोस्त हो, क्या तुम्हरा उधारी कभी दिए नहीं ! दिए है न !!!

मनसौखी- अबे फक्कड़ कितनी बार ये बात बोलोगे, दस में छः  गायब कर देते हो, बचा चार तो उसको भी तुम ऐसा घुमा घुमा कर देते हो पता ही नहीं चलता !

फक्कड़ - अब छोडो पुरानी बात, दाढ़ी बना दो 

मनसौखी- अच्छा ! चलो आज छुरी से बना देते है!

फक्कड़- संभल के मनसौखी,  कहीं गलती से रेल मत देना 

मनसौखी- एक बार रेला जाओगे तो आगे से कड़की दूर करके आओगे 

(इसी बीच मनसौखी और फक्कड़ के बचपन का दोस्त घासी पहुँचता है| फक्कड़ मनसौखी नाई की दुकान के शीशे में घासी को आता देख खुश हो जाता है )

फक्कड़ - आओ आओ घासी भाई

घासी- खु खुश त त तो ऐसे ह ह हो रहे हो जैसे म म म मन स स  स सौखी की मेहरारू (घासी की बात सुन मनसौखी हंस रहा था तभी)

मनसौखी- पहिले हकला ले घसिया तब बोल (गुस्से में)

फक्कड़- अबे मनसौखी नाराज न हो उस बेचारे का क्या दोष 

मनसौखी- नाराज वो नहीं तुम भी न होना !  

फक्कड़- घासी भाई तुम आते तो बहार आ जाती है 

घासी- म मम मै जा रहा हूँ तुम सा साले अपना समझो 

फक्कड़- मतलब 

मनसौखी- इस साले की वजह से तोरा आधा मुछ सफाचट हो गया और मुस्कुराओ 

फक्कड़- अबे मनसौखी ये क्या कर दिए ! (अफ़सोस भाव में )

मनसौखी- बार बार कहते है बाल दाढ़ी बनवाते समय इधर उधर मत देखो लो घसिया आया और अपना काम करके चला गया | 

फक्कड़- आज कथा सुनाने सनेही के घर जाना है अब क्या करें !

मनसौखी- देखा फक्कड़ भाई, जो होना था वो हो गया, भला होनी को कौन रोक सकता है  

फक्कड़- बोल तो साले ऐसे रहे हो जैसे मेरा बाप मर गया है, होनी को कौन टाल सकता है (क्रोध भाव में )

मनसौखी- अरे गुस्साते क्यों हो फक्कड़ भाई , तुम्हरी सकल देख कर पंडिताइन खुश हो जायेगी 

फक्कड़ - अबे साले बिना मुछ का, कोई मर्द कैसे कहलायेगा बे 

मनसौखी- ये सब घसिया की वजह से हुआ है जब जब आता है तब तब खुछ न कुछ जरूर हो जाता है 

फक्कड़- साले सदमे में डाल दिए 

मनसौखी- अबे फक्कड़ आज से तुम नानमुछ बाबा कहलाओगे 

(तभी घसिया आ जाता है)

घासी- इ इ  इ का फ फक फक फक्कड़ बाबा, तो तो तो तोहार मुछ 

फक्कड़- (गाली देते हुए) साले इसी समय आना था 

मनसौखी- अबे घसिया, बाबा को ठंडा कर कमीने 

घासी- को को को कोकाकोला 

मनसौखी- हाँ लेते आओ 

(घासी तीन ठंडा बोतल लेते आता है )

घासी- प प प क पकड़ो फ फ फ फक्क्ड़ भाई 

(फक्कड़ गुस्से में एक बोतल लेते हुए बोलता है )

फक्कड़- आज मेरी मर्दानगी पर धब्बा लगा है मनसौखी, घसिया तुम्हारी घास पर ऐसा दवा मरूंगा की साले जड़ समेत सुख जाओगे 

(फक्कड़ पैर  पटकते हुए चलते बनता है)

मनसौखी- जान बचे तो लाखो पाए... अबे घसिया साले, फक्कड़वा सनेही के घर गया है पूजा कराने, तुम वहां चले जाना 

घासी- ह ह ह हहम अब अभी जा रहे है 


(शेष अगले भाग में )

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