विस्फोटक आबादी से पिछड़ा भारत
आज विश्व जनसंख्या दिवस है। विश्व में सबसे ज्यादा जनसंख्या भारत उसके बाद चीन का है बावजूद उस पर नियंत्रण करने का कोई सही उपाय अपनाया नहीं जा रहा है।
धर्म का धंधा करने वालों के लिये ये सब ईश्वरीय कृपा है लेकिन सरकार को इस पाखंडी कृपा से मुक्ति का कोई ठोस उपाय सूझ नहीं रहा। विकासशील देश खासकर भारत ऐसे पाखंडी धर्म से जकड़ा हुआ है जिसको रोकने के लिए ठोस कानून की आवश्यकता है।
हर हाथ को रोजगार तभी मिलेगा जब जनसंख्या पर नियंत्रण होगा। तमाम कल कारखाना खोल दीजिये, उत्पादन क्षमता दिन ब दिन बढ़ाते रहे परंतु बढ़ती जनसंख्या से बेरोजगारी व भूखमरी को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
भारत का कानून लचीला है या राजनीतिक स्वार्थ के कारण लचीला बना दिया गया है जिसकी वजह से भारत में जनसंख्या जैसे विषम समस्या से निजात पाने का कोई कानून नहीं बनाया जा सका है। आज सत्ता कैसे बना रहे या कैसे काबिज़ किया जाये! उसके लिए दिन रात-पक्ष विपक्ष एक सुर में लगे हुए है।
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गाँधी जी ने परिवार नियोजन के अन्तर्गत हम दो - हमारे दो बस, छोटा परिवार सुखी परिवार का नारा दिया और लागू करना चाहा लेकिन विपक्ष में लालू प्रसाद यादव जैसे नेता इस हद तक विरोध किये कि आधा दर्जन बच्चा पैदा कर दिये।
परिस्थितियां एक जैसा हमेशा नहीं होता। 1950 के बाद लोगों को नौकरी पकड़-पकड़ कर दिया जाता था यहाँ तक कि अनपड़ है फिर भी लोग सरकारी नौकरी छोड़ किसानी की तरफ भाग खड़े होते थे। लेकिन आजादी के 75 साल बाद उसके विपरीत हो गया। आज लोग नौकरी के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे है।
आज देश में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है सरकार किसी की भी हो इस मुद्दे पर चाॅकलेटी बातें होती है। जो बेहद शर्मनाक है।
2014 में मोदी सरकार एक राष्ट्र एक कानून पर देश से जनमत मांगा, देश ने भरपूर जनमत दिया लेकिन सरकार देशवासियों को भ्रमित करते हुए एक राष्ट्र एक चुनाव जैसे मुद्दे पर ध्यान भटका दिया जो एजेण्डे में था ही नहीं । आज इस मुद्दे पर कोई बात नहीं करता यहाँ तक पूरी एनडीए घटक दल भी।
आज देश में जनसंख्या नियंत्रण विधेयक का न लाना, सरकार की विफलता का सबसे बड़ा कारण है। सरकार अपनी विफलता के लिए बिलकुल गंभीर नहीं है और न ही भविष्य में विधेयक लाने की योजना है।
140 करोड़ जनसंख्या वाले देश में बिहार को मजदूर राज्य का दर्जा दिया जाता है जो राज्य और केन्द्र दोनों के लिए शर्मनाक है। क्यों और क्या कारण है? इसका जबाब उल्टा पुल्टा है जबकि आज पूरे विश्व को भारत उच्च तकनीक, उच्च सीईओ, उच्च वैज्ञानिक व चिकित्सक, उच्च शिक्षाविद और मेहनतकश मजदूर देता है। अगर विश्व नजरीये से देखा जाये तो भारत मजदूर देश है
मेरा मानना है अगर कोई भारतीय विदेश में करोड़ों रूपये की नौकरी करता है तो वो भी उच्च श्रेणी का मजदूर ही कहलायेगा। भले ही पूरी शान ए शौकत से क्यों न रहता हो!
आज पूरे विश्व में जिस देश की जनसंख्या कम या नियन्त्रित है वो देश विकसित राष्ट्र है जैसे अमेरिका, रुस, जर्मनी, जापान इत्यादि। आज भारत जनसंख्या के बल पर डंकापति बना हुआ है। हमारा आयात और निर्यात इसका ज्वलंत उदाहरण हैं।
अगर आज जनसंख्या जैसे मुद्दे पर सरकार गंभीर होगी तो 2075 तक निश्चय ही भारत का स्वरूप आज की परिस्थिति के विपरीत होगा। विकसित राष्ट्र के लिए आगे का मतदान जनसंख्या विधेयक जैसे मुद्दे पर होना चाहिए जिससे देश का भविष्य उज्जवल हो।
जयहिंद


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